कार्यकर्ता विकास वर्ग में अनुशासन, साधना और सूचना पालन पर बललखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र का कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) का दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ शुभारम्भ हुआ। उद्घाटन सत्र में क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, वर्ग के सर्वाधिकारी सरदार स्वर्ण सिंह जी तथा क्षेत्र संघचालक कृष्ण मोहन जी उपस्थित रहे।

पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के चारों प्रान्त – कानपुर, अवध, काशी, गोरक्ष तथा नेपाल से आए 289 शिक्षार्थियों को सम्बोधित करते हुए क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने वर्ग के अनुशासन एवं सूचना पालन के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग किसी दबाव में नहीं, बल्कि स्वप्रेरणा से किया जाने वाला साधना का कार्य है। इसलिए वर्ग की प्रत्येक सूचना का अक्षरशः पालन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संघ छोटी-छोटी बातों के माध्यम से व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है और यही प्रक्रिया समाज परिवर्तन का आधार बनती है। संघ पिछले 100 वर्षों से इसी कार्यपद्धति के माध्यम से राष्ट्र जीवन को सुदृढ़ कर रहा है।

उन्होंने वरिष्ठ प्रचारक सूर्यनारायण राव जी का उदाहरण देते हुए बताया कि 70 वर्ष की आयु में भी चेन्नई से काशी प्रान्त के बस्ती जिले में आयोजित वर्ग हेतु 48 घंटे की लंबी यात्रा केवल इसलिए की क्योंकि सूचना हो चुकी थी। उन्होंने कहा था कि “संघ में 40 वर्षों में मैंने सूचना का पालन करना सीखा है।”

स्वयंसेवक को किसी भी कार्यक्रम में विलम्ब से नहीं पहुँचना चाहिए। संघ के अनुशासन की प्रशंसा समाज के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारी भी करते हैं। सरसंघचालक जी के प्रवास के दौरान सुरक्षा अधिकारियों ने संघ के अनुशासन की सराहना की थी। 

क्षेत्र प्रचारक जी ने कहा कि वर्ग केवल प्रशिक्षण का स्थान नहीं, बल्कि साधना स्थली है और प्रत्येक शिक्षार्थी साधक है। भारतीय परम्परा में साधना हेतु त्याग, समर्पण और कठोरता आवश्यक मानी गई है। चित्रकूट की मंदाकिनी नदी के तट पर संतों के तप और साधना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा इन्हीं साधकों के बल पर आज भी जीवित है। प्रसिद्ध संत स्वामी अड़गड़ानंद जी ने शिक्षार्थियों के लिए प्रसाद एवं अंगौछा भेजा है, जो संत परंपरा का आशीर्वाद है।

जल संरक्षण और पंच परिवर्तन पर विशेष आग्रह

कार्यकर्ता विकास वर्ग में अनुशासन, साधना और सूचना पालन पर बलउन्होंने प्रतिदिन पर्याप्त जल सेवन तथा जल के मितव्ययी उपयोग का आग्रह किया। उन्होंने नागपुर वर्ग का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि 1992 में 48 घंटे जल संकट रहने के बावजूद शिक्षार्थियों ने अनुशासनपूर्वक जल संचय कर उसका संयमित उपयोग किया। भविष्य का बड़ा संकट जल का होगा। राजस्थान एवं चित्रकूट के उदाहरण देते हुए बताया कि कई क्षेत्रों में लोग दूर-दूर से पानी लाने को विवश हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से पंच परिवर्तन के पालन का भी आह्वान किया।

सामान्यतः संस्थापक के जाने के बाद संगठन की कार्यपद्धति कमजोर पड़ जाती है, किन्तु संघ की छठी पीढ़ी आज भी उसी सक्रियता और समर्पण के साथ कार्य कर रही है। उपेक्षा और उपहास के लंबे दौर के बाद भी संघ निरंतर विस्तार और प्रभाव के साथ समाज जीवन में सक्रिय है।

उन्होंने शिक्षार्थियों से वर्ग में अधिकतम सीखने, अनुशासनपूर्वक रहने तथा समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हेतु स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर वर्ग कार्यवाह देवेन्द्र अस्थाना जी, वर्ग पालक मिथिलेश नारायण जी एवं सह वर्ग कार्यवाह रास बिहारी जी उपस्थित रहे।