जोधपुर। पाली जिले में चल रहे एक कन्या गुरुकुल में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और संस्कारों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। गुरुकुल की विशेषता यह है कि इसकी शुरुआत करने वाली साध्वी भगवती बाईजी स्वयं कभी स्कूल नहीं गई थीं। आज वह लगभग 1300 बेटियों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। गुरुकुल में बच्चियां उन्हें प्यार से “दाताश्री” कहकर बुलाती हैं।  पाली शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर रोहट क्षेत्र के नया चेंडा गांव में स्थित श्री राजेश्वर भगवान आंजणी माता कन्या गुरुकुल साढ़े 27 बीघा भूमि में फैला हुआ है। यहां स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, भोजनशाला और स्टाफ क्वार्टर जैसी सुविधाएं उपलब्ध है। यहां वर्तमान में कक्षा 6 से लेकर कॉलेज तक की छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं, जिनमें से अधिकतर हॉस्टल में रहती हैं।  गुरु की सीख से बदला जीवन  साध्वी भगवती बाईजी ने 23 वर्ष की उम्र में वैराग्य धारण किया था। वे रोहट क्षेत्र के पुराना चेंडा स्थित राजाराम महाराज की बगीची में साध्वी हंजाबाई की शिष्या बनीं। एक दिन उनकी गुरु ने उन्हें गीता पढ़ने के लिए कहा, लेकिन भगवती बाईजी ने बताया कि उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता। तब गुरु ने कहा कि बिना शिक्षा के ज्ञान प्राप्त करना संभव नहीं है।  गुरु की इसी बात ने उनके जीवन की धारा को बदल दिया। उन्होंने आश्रम में रहकर पढ़ना-लिखना सीखा और बाद में गीता सहित कई धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया। उन्होंने सैकड़ों भजन भी लिखे। इसी अनुभव के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा के लिए काम करने का संकल्प लिया।  साध्वी भगवती बाईजी ने 02 मई, 2013 को बालिका शिक्षा के लिए गुरुकुल स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने तय किया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और अपनी बचत से स्कूल का निर्माण करवाएंगी। उनकी इस पहल से कई श्रद्धालु भी जुड़ गए।  फरवरी 2014 में गुरुकुल की नींव रखी गई और भवन निर्माण शुरू हुआ। साल 2016 में गुरुकुल की औपचारिक शुरुआत हुई। शुरुआती दौर में यहां पहली से 9वीं कक्षा तक की पढ़ाई होती थी और पहले ही सत्र में 164 बेटियों ने प्रवेश लिया था। आज यहां करीब 1300 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। गुरुकुल में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाई जाती है। वहीं कॉलेज स्तर पर आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस विषयों की पढ़ाई भी उपलब्ध है। कॉलेज की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई।जोधपुर। पाली जिले में चल रहे एक कन्या गुरुकुल में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और संस्कारों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। गुरुकुल की विशेषता यह है कि इसकी शुरुआत करने वाली साध्वी भगवती बाईजी स्वयं कभी स्कूल नहीं गई थीं। आज वह लगभग 1300 बेटियों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। गुरुकुल में बच्चियां उन्हें प्यार से “दाताश्री” कहकर बुलाती हैं।

पाली शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर रोहट क्षेत्र के नया चेंडा गांव में स्थित श्री राजेश्वर भगवान आंजणी माता कन्या गुरुकुल साढ़े 27 बीघा भूमि में फैला हुआ है। यहां स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, भोजनशाला और स्टाफ क्वार्टर जैसी सुविधाएं उपलब्ध है। यहां वर्तमान में कक्षा 6 से लेकर कॉलेज तक की छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं, जिनमें से अधिकतर हॉस्टल में रहती हैं।

गुरु की सीख से बदला जीवन

साध्वी भगवती बाईजी ने 23 वर्ष की उम्र में वैराग्य धारण किया था। वे रोहट क्षेत्र के पुराना चेंडा स्थित राजाराम महाराज की बगीची में साध्वी हंजाबाई की शिष्या बनीं। एक दिन उनकी गुरु ने उन्हें गीता पढ़ने के लिए कहा, लेकिन भगवती बाईजी ने बताया कि उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता। तब गुरु ने कहा कि बिना शिक्षा के ज्ञान प्राप्त करना संभव नहीं है।

गुरु की इसी बात ने उनके जीवन की धारा को बदल दिया। उन्होंने आश्रम में रहकर पढ़ना-लिखना सीखा और बाद में गीता सहित कई धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया। उन्होंने सैकड़ों भजन भी लिखे। इसी अनुभव के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा के लिए काम करने का संकल्प लिया।

साध्वी भगवती बाईजी ने 02 मई, 2013 को बालिका शिक्षा के लिए गुरुकुल स्थापित करने की घोषणा की थी। उन्होंने तय किया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और अपनी बचत से स्कूल का निर्माण करवाएंगी। उनकी इस पहल से कई श्रद्धालु भी जुड़ गए।

जोधपुर – गुरुकुल में 1300 बेटियों को शिक्षित कर रहीं ‘दाताश्री’फरवरी 2014 में गुरुकुल की नींव रखी गई और भवन निर्माण शुरू हुआ। साल 2016 में गुरुकुल की औपचारिक शुरुआत हुई। शुरुआती दौर में यहां पहली से 9वीं कक्षा तक की पढ़ाई होती थी और पहले ही सत्र में 164 बेटियों ने प्रवेश लिया था। आज यहां करीब 1300 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। गुरुकुल में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करवाई जाती है। वहीं कॉलेज स्तर पर आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस विषयों की पढ़ाई भी उपलब्ध है। कॉलेज की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई।

गुरुकुल में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित है। छात्राओं को एक विशेष कार्ड दिया जाता है, जिसके माध्यम से वे अपने माता-पिता से बात कर सकती हैं। उस कार्ड में परिवार के केवल दो नंबर सेव किए जाते हैं और बच्चियां उन्हीं नंबरों पर कॉल कर सकती हैं। इसके अलावा गुरुकुल परिसर में चिप्स, कुरकुरे और बिस्किट जैसी चीजें लाना भी मना है। यहां बच्चों के खानपान में पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।

गौशाला से मिलता है दूध और घी

गुरुकुल परिसर में करीब 10 बीघा में गौशाला भी संचालित की जा रही है। यहां 125 दुधारू पशुओं का दूध और घी छात्राओं के भोजन में उपयोग किया जाता है। वहीं लगभग 450 ऐसे पशु भी हैं जो दूध नहीं देते, लेकिन उनकी सेवा और देखभाल लगातार की जाती है।

अनुशासित दिनचर्या

गुरुकुल में रहने वाली छात्राओं की दिनचर्या पूरी तरह अनुशासित है। छात्राएं सुबह 5 बजे उठती हैं। योग और व्यायाम के बाद स्कूल जाती हैं। पढ़ाई के साथ खेलकूद और हॉस्टल में अध्ययन का भी समय तय है। रात 11 बजे तक सभी छात्राओं को सोना होता है।

गुरुकुल प्रशासन का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि बेटियों को संस्कारवान और अनुशासित बनाना भी है।

30 अप्रैल को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कन्या महाविद्यालय भवन का लोकार्पण किया था।