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विद्या भारती अखिल भारती कार्यकारिणी की हुई घोषणा

गोविंद चंन्द्र मोहंत बने अखिल भारतीय संगठल मंत्री तो अवनीष भटनागर को मिला अखिल भारतीय महामंत्री का दायित्व

विद्या भारती अखिल भारती कार्यकारिणी की हुई घोषणारांची, 27 मार्च : रांची के कुदलुम, श्री कृष्ण चंन्द्र गांधी षैक्षिक नगर स्थित आदित्य प्रकाष जालान टीचर्स ट्रेनिंग काॅलेज में आयोजित विद्या भारती के साधारण सभा के अंतिम दिवस में अखिल भारतीय कार्यकारिणी की घोषणा हुई जिसमें संरक्षक श्री ब्रह्म देव जी शर्मा, अध्यक्ष श्री दुसी रामाकृष्ण राव, उपाध्यक्ष डॉ शंकर राय, उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र प्रसाद खेतान, उपाध्यक्ष श्रीमती साधना भंडारी, उपाध्यक्ष डॉ रविंद्र कान्हेरे, उपाध्यक्ष डॉक्टर बसंत कुमार पंडा, संगठन मंत्री श्री गोविंद चंद्र मोहंत, सह संगठन मंत्री श्री यतीन्द्र कुमार शर्मा, सह संगठन मंत्री श्रीराम आरावकर, महामंत्री श्री अवनीश भटनागर, कोषाध्यक्ष श्री जैन पाल जैन, मंत्री श्री शिव कुमार, मंत्री श्री किशन वीर, मंत्री डॉ॰ मधुश्री सावजी, मंत्री श्री ब्रह्माजी राव, मंत्री श्री कमल किशोर सिन्हा, सह मंत्री प्रो॰ संतोष आनंद, सह मंत्री श्रीमती पवित्रा दहल, सह मंत्री श्रीमती नंदिनी लक्ष्मीकांत, सह मंत्री श्रीमती यज्ञमती वासुमतारी, सह मंत्री श्री रोहित वासवानी, कार्यकारिणी सदस्य श्री जे. एम. काशीपति, कार्यकारिणी सदस्य डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी, कार्यकारिणी सदस्य श्री रविन्द्र चमरिया, कार्यकारिणी सदस्य श्री रविन्द्रन, कार्यकारिणी सदस्य डाॅ॰ ज्वाला प्रसाद, कार्यकारिणी सदस्य डाॅ0 राजश्री वैद्य, कार्यकारिणी सदस्य प्रो0 कीर्ति पाण्डेय। ज्ञात हो कि विद्या भारती अखिल भारतीय षिक्षा संस्थान कार्यकारिणी की हरेक तीसरे वर्ष चुनाव होती है।

विद्या भारती अखिल भारती कार्यकारिणी की हुई घोषणाबैठक में हरेक क्षेत्रों के कार्यों की समीक्षा की गई तथा आगामी षैक्षिक वर्ष के लिए योजनाएँ बनाई गई जिसमें डाॅ0 कृष्ण गोपाल राव जी ने कुटुम्ब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य (आर्थिक, सामाजिक), संगीत, संस्कृत विषय, आजादी अमृत महोत्सव, समूह सह बैठक, बालिका शिक्षा, जनजातीय षिक्षा, सेवा क्षेत्र, आंगनबाड़ी, सीमावर्ती आदि की शिक्षा संपर्क बढ़ाने के अलावा मानक परिषद सहित विद्या भारती के चार आयामों पर चर्चा की गई। ब्रिज कोर्स, अतिरिक्त कक्षाएं, ग्रीष्मकालीन कक्षाएं, विशेष और विशिष्ट कुछ करते-करते सिखना, डिजिटल प्रौद्योगिकी उन्नयन, आचार्य की भूमिका, अभिभावकों की भूमिका, ग्रीष्मकालीन प्रषिक्षण की योजना बनाना, विशिष्ट स्कूल, शिक्षक उन्नयन, कौशल विकास प्रषिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार किया गया। विष्व प्रौद्योगिकी यूनेस्को द्वारा शिक्षक गुणवत्ता, शिक्षा प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए अपनी षिक्षा को समृद्ध बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।


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